मंगलवार, 11 अक्टूबर 2011

दीपावली

श्री रामचंद्र जी के अयोध्या लौटने पर उनके स्वागत में एक नवगीत -



हेली मंगल गाओ आज ,

सहेली मंगल गाओ आज |



ढोल नगाड़ा नौपत बाजे

अयोध्या में आज

तोरण द्वार सजे सब आँगन

कौशल्या घर आज |



मोत्यां चौक पुरावो है सखी

झिलमिल आरती थाल

रामचंद्र जी लौटेंगे सखी

सीता लखन संग आज |



शुभ घड़ी आई भ्राता मिलाई

दशरथ के घर आज

भरत की तपस्या लायेगी

सखी ! खुशियों के रंग आज |



उर्मिला की होगी साधना

पूरी है सखी आज

कैकेयी ,सुमित्रा के मन पुलकित ,

पूरे हुए सब काज |



अमावस की रात सजेगी

अयोध्या नगरी आज

घी के दीपों की जगमग होगी

उत्सव मनेगा आज |



मोहिनी चोरडिया

सोमवार, 10 अक्टूबर 2011

जो गुज़रे थे कभी तुम्हारे साथ


बीत गये जीवन की किताब के,
पन्ने फड़फड़ाये
उन में दबे सूखे गुलाबों ने
स्मृतियों पर पड़ी धूल के आवरण हटाये ।


एक भीनी सी खुशबु ने उमग कर
भर दिया नासापुटों को
फिर, बिखर गई, चारों ओर मेरे,
मन बहकने को हुआ आतुर,
तन सिहर गया ।


खूबसूरत पल गुज़रने लगे
आँखों के सामने से,लगे चटकने
दीपावली के पटाखों की लड़ियों से
फुलझड़ियों की सी सतंरगी आभा बिखेरते
चकरी से घूम गये मन में ।


एक मीठी सी मुस्कान ने,
चेहरे को नई रंगत दी
इक ज़माने के बाद खिल उठा मन,
पुलक गया तन
खिले–खिले अनार सा ।


बरसों बाद आईना
देखने का मन हुआ
आँखें मूँद ,फिर से जिया मैंने,
उन पलों को
जो गुज़रे थे कभी तुम्हारे साथ ।


मोहिनी चोरडिया
चेन्नई

बुधवार, 5 अक्टूबर 2011

हाइकू कवितायेँ

एक बूँद उड़ी

सागर से

कब लौटेगी निज घर ?



दूर गगन

टूटे पंख

जीवित संकल्प |



अमृत की बूँदें

जीवन से दूर

हम विषपायी जनम के|



नीम की निम्बोली

सर उचका कर बोली

मिश्री से मेरी अनबोली |



गाँव की चौपाल

निर्विकार निर्विचार से बैठे लोग

अनासक्त योगी |



यमुना का कूल

नीवं का पत्थर

ताज महान |



गुलाब के साथ कांटे

खूबसूरती का

सुरक्षा कवच |



मोहिनी चोरडिया

क्वार में

नव उत्सव
हमारे आँगन आना |

खुशियों की गमक को
चेहरे की चमक को
विस्तार दे जाना |

उमंगों के मेलों को
चाहत के रेलों को
तुम साथ लाना |

अमावस की रात को
दीयों की पांत को
नया आलोक दे जाना |

पटाखों की लड़ियों को
बच्चों की फुलझडियों को
नव उल्लास दे जाना |

हल जोतते भोला को
खड़ी फसलों को
नयी मुस्कान दे जाना |

पडौस की बूढ़ी काकी की
अन्दर धंसी आँखों को
बेटों की चाहत की
एक झलक दे जाना |

मोहिनी चोरडिया
चेन्नई

शुक्रवार, 23 सितंबर 2011

मानवता


मुसलमान क़त्ल करें
हिंदू जिबह करें
दोनों की करुणा
एवं मानवता मन की
मर चुकी है
आक्षेपों का दौर
शुरु होता है
लेकिन तुम्हारी इस आग
का शिकार तो
बार-बार वही ‘बलि का बकरा’
बनता है, जो सदियों से बन रहा है
उसको कुछ फर्क नहीं पड़ता
हिन्दू मारें
या मुसलमान काटें
उसे तो, जीवन से, हाथ
धोना ही है
दोनों की दीवानगी आत्मा को
या कहें परमात्मा को काटती है
अल्लाह को मिटाती है
गीता पढ़ें या
पढ़ें कुरान
न जज़्बात बदले
न जीवन की समझ आयी
सिर्फ साम्प्रदायिकता फैलायी
धर्म को बदनाम किया
मज़हब को नापाक किया
अब भी समय है,
कहते हैं, " जब जागें तभी सवेरा "
बाज़ आयें गुनाहों से
कोशिश ही नहीं संकल्प करें
आने वाली पीढ़ी के लिए
छोडें एक दुनिया ऐसी
जहां सिर्फ मानवता पनप रही हो
न हो तेरा, न हो मेरा
न हो हिन्दू न हो मुसलमान
सब हों समान ।

मोहिनी चोरडिया

नए साल की शुभकामनाएं


आतंकवाद के लम्बे हाथों ने
जिसका बेटा छीन लिया
चीत्कार कर उठी आत्मा उसकी
एक बार तो,
लेकिन फिर संभली
दूसरे बेटे को भी तैयार कर दिया
देश की हिफाज़त के लिए
शहीद की माँ की
इस हिम्मत को,
नये साल की शुभकामनाएँ |  
   
जो बेटे की लाश को,
अपना कंधा देता है, और
चाहकर भी रोता नहीं
शहीद के पिता के
इस तेवर को,
नये साल की शुभकामनाएँ | 

शहादत का सिन्दूर, जिसे
चिर सधवा रखता है
जो जीवन भर बूढ़ी सास, और
नन्हें बच्चों का सहारा बनी रहती है
देश की बेटी, शहीद की पत्नि के,
इस हौसले को
नये साल की शुभकामनाएँ ।

ताज और ट्राइडेन्ट होटल की लाँबी
जो लहुलुहान होकर सिसक पड़ी,
लेकिन
फिर तन कर खड़ी हो गई
होटल की लाँबी को और
इसे तैयार करने वालों की
इस फितरत को
नये साल की शुभकामनाएँ ।

जिसकी पत्नि और बच्चे नहीं रहे
फिर भी काम से मुहँ नहीं मोड़ा,
उस मेनेजर के, और
सोलिडेरिटी दिखाने के लिए
ताज में काफी पीने आये मुम्बईकारों के
इस ज़ज़्बे को
नये साल की शुभकामनाएँ ।

मेरे देश के गुरूर को
सैनिकों, देशवासियों के सुरूर को
शहीदों की शहादत को सलामी देने के लिए
कवियों द्वारा लिखी गई पंक्तियों
के जूनून को
नए साल की शुभकामनाएं |


मोहिनी चोरडिया

पर्यावरण


मनुष्य तुम हो प्रज्ञावान
मत बने रहो सिर्फ नीतिवान
समझो समय की चाल
करो विवेक का इस्तेमाल, वरना,
वरना करना पडे़गा मलाल ।

जीवन जीने की कला सीखो
वृक्ष लताओं को ही नहीं
प्रकृति के कण कण को सींचो
अन्यथा पडे़गा दुष्काल ।

हवाओं का हमसे रिश्ता है गहरा
हमारी तुम्हारी ज़िद से देखो, पानी भी ठहरा
बहने दो उन्हें अविरल अबाध
तभी देगें ये हमारा साथ ।

मैत्री सदभाव का रिश्ता बनाओ
पशु पक्षियों पर दया दिखाओ
मत करो इन पर जुल्म मनमानी
वरना उठानी पडे़गी हानि ।

बिना इन सबके, जीना है मुश्किल
फिर क्यों बने हो तुम, इतने तंगदिल ?
इन सबका करो कल्याण
वरना करना पडे़गा मलाल |

जिओ और जीने दो की वाणी
सबके लिए है कल्याणी
अध्यात्म से मिलकर विज्ञान भी
हो उठेगा निहाल |

मोहिनी चोरडिया