बुधवार, 5 अक्टूबर 2011

क्वार में

नव उत्सव
हमारे आँगन आना |

खुशियों की गमक को
चेहरे की चमक को
विस्तार दे जाना |

उमंगों के मेलों को
चाहत के रेलों को
तुम साथ लाना |

अमावस की रात को
दीयों की पांत को
नया आलोक दे जाना |

पटाखों की लड़ियों को
बच्चों की फुलझडियों को
नव उल्लास दे जाना |

हल जोतते भोला को
खड़ी फसलों को
नयी मुस्कान दे जाना |

पडौस की बूढ़ी काकी की
अन्दर धंसी आँखों को
बेटों की चाहत की
एक झलक दे जाना |

मोहिनी चोरडिया
चेन्नई

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