बुधवार, 5 अक्टूबर 2011

हाइकू कवितायेँ

एक बूँद उड़ी

सागर से

कब लौटेगी निज घर ?



दूर गगन

टूटे पंख

जीवित संकल्प |



अमृत की बूँदें

जीवन से दूर

हम विषपायी जनम के|



नीम की निम्बोली

सर उचका कर बोली

मिश्री से मेरी अनबोली |



गाँव की चौपाल

निर्विकार निर्विचार से बैठे लोग

अनासक्त योगी |



यमुना का कूल

नीवं का पत्थर

ताज महान |



गुलाब के साथ कांटे

खूबसूरती का

सुरक्षा कवच |



मोहिनी चोरडिया

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