एक बूँद उड़ी
सागर से
कब लौटेगी निज घर ?
दूर गगन
टूटे पंख
जीवित संकल्प |
अमृत की बूँदें
जीवन से दूर
हम विषपायी जनम के|
नीम की निम्बोली
सर उचका कर बोली
मिश्री से मेरी अनबोली |
गाँव की चौपाल
निर्विकार निर्विचार से बैठे लोग
अनासक्त योगी |
यमुना का कूल
नीवं का पत्थर
ताज महान |
गुलाब के साथ कांटे
खूबसूरती का
सुरक्षा कवच |
मोहिनी चोरडिया
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