बुधवार, 21 सितंबर 2011

खनक

हाँ मैं तुझे भुला

न पाऊंगा

जब भी कोई खनकती आवाज़

सुनाई देगी

तुझे आसपास पाऊँगा ।

उदास चेहरे पर

बड़ी बड़ी हिरणी जैसी आँखे

जब भी देखूंगा

और उनकी चमक, जब भी

अपने रंग बिखेरेगी

तुझे आसपास पाऊँगा ।

शर्माती लजाती अदाओं से

दिल को धड़काता

बाहों में समाने को आतुर, कोई साया,

ऐसा समां जब भी बनेगा

तुझे आसपास पाऊँगा ।

किसी चौदहवीं की रात

चाँद जब झांकेगा खिड़की से

और बाहें मेरी होंगीं आतुर

चांदनी सा बदन समेटने को

तुझे आसपास पाऊँगा |

आसमां में दिखेगा इन्द्रधनुष

फिजां में तैर रही होगी खुशबु

तुझे आसपास पाऊंगा

हाँ! मैं तुझे भुला न पाऊँगा ।


मोहिनी चोरडिया


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