शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2012

मेरे मन



मेरे मन ,
बसंत के गाँव चल तो सही
सब कुछ है वहीं
उमंग उल्लास का गाँव है, रे 
प्रीत की डोर थामे ,चल तो सही | सब कुछ है वहीं |

सावंरिया की बंसी है
गोपियों का रास
रस से भरी राधा है
मदमाता मधुमास |

प्यार की मनुहार में पगा
सतरंगी यौवन है
गौरी की गारी को
झेल रहे बनवारी हैं |

नेह की पिचकारी है
रंगों की बौछार है 
पोखर पड़े गालों पे
चटक गुलाबी प्यार है |

वंशी की लय पे छिड़ा
फागुन का अभिसार है
सखा नंदलाल भये पलाश
वृषभानु लली भई गुलाल है |

बहकी-बहकी राधा है
चहंके-चहंके मुरारी
जोरी-बरजोरी है 
बुरा न मानों होरी है |


मोहिनी चोरड़िया 



  

  

  

मंगलवार, 14 फ़रवरी 2012

ये फागुनी होली

ये फागुनी होली

पलाश, टेसू के फूलों की होली
केसर, चन्दन के पीले रंगो की होली
उड़ते अबीर गुलाल की होली ,
रंगों के अम्बार की होली
ढोल की थाप पर कोडे़ मारती औरतें, और
चहचहाते लोगों की होली
ये फागुनी होली ।  

आज बसंत बहार की होली
हँस रही अमराई की होली
फूली सरसों की क्यारी की होली
खेतों और खलिहानों की होली
मदमाते मधुमास की होली,
कली भौंरों के अभिसार की होली
ये फागुनी होली ।

बृज की बरसाने की होली 
राधा और गोपाल की होली
जोरी और बरजोरी की होली
गौरी और साजन की होली
बाहों की जंजीरों की होली
आज हसीन नज़ारों की होली
ये फागुनी होली ।


मस्ती ओ उल्लास की होली
देवर और भाभी की होली
जीजा और साली की होली
सारंगी सांसों की होली
सतंरगी यौवन की होली
आज मेरे हमजोली की होली
ये फागुनी होली  | 


चंग और ढोल की थाप पर 
मंजीरे लेकर 
फाग गाते लोगों की होली
भंग की तरंग में डूबी 
राजस्थान की होली 
प्यार के रंग बिखेरती ये हुडदंगी होली
ये फागुनी होली । 






मोहिनी चोरड़िया  

 

सोमवार, 6 फ़रवरी 2012

मालिनी बसंत


तन-मन की तरुणाई लाई
मालिनी बसंत आई|

फूलों का उपहार
गंधों का त्यौहार
भौंरों का अभिसार लाई
मालिनी बसंत आई |

मदमाता मधुमास
फूलता पलाश
पवन पगलाती लाई
मालिनी बसंत आई |

रसभरी अमराई
कीटों का गुँजार
कलियों में सिहरन लाई
मालिनी बसंत आई |

मन में उमंग
तन में उल्लास
आँखों में लाज लाई
मालिनी बसंत आई |

नेह की पिचकारी
केसर,चंदन ,टेसू के
रंगों का अम्बार लाई
मालिनी बसंत आई |

कविताओं का कुंकुम
गीतों का अबीर
गज़लों का गुलाल लाई
मालिनी बसंत आई |

रसिया और फाग लाई
केसरिया मजाक लाई
तन-मन की तरुणाई लेकर
मालिनी बसंत आई |


मोहिनी चोरड़िया


गुरुवार, 2 फ़रवरी 2012

बसंत महीने में


बनन में बागन में
बगरयो बसंत है |
खेतन,खलिहानन में
फागुनी उमंग है ||


फूटी अमराइयों में
बासंती सुगंध है |
गुनगुन गुंजाता
आम्रकुंजों में अनंग है ||


चम्पा और चमेली ने
कलियाँ चटकाई हैं |
टेसू और पलाश ने
आग लगाईं है ||


गाँवों ढाणियों की डगर
फूलों का लिबास है |
पर्वतों मैदानों में
सेमल अमलतास है ||


बसंत महीने में
पवन पगलाई है |
प्रकृति बंजारिन बनी
मस्ती भरी रंगत छाई है ||


मोहिनी चोरडिया